क्या आप जानते हैं कि क्या कहते हैं सात फेरों के सात वचन - fun offbeat

Latest

Monday, 6 November 2017

क्या आप जानते हैं कि क्या कहते हैं सात फेरों के सात वचन

saat phere, saat vachan, hindu marriage rituals, saat pheron ke saat vachan
हिन्दू धर्म में विवाह के लिए सात फेरे लेना आवश्यक है, न एक फेरा काम और न एक ज्यादा। हर फेरे के साथ एक वचन जुड़ा होता है। जिसे पति पत्नी को जीवन भर निभाना होता है। यदि आप विवाहित हैं तो आपने भी सात फेरे अवश्य लिए होंगे लेकिन क्या आपको उन सात फेरों के वचन याद हैं? विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।

प्रथम वचन - 

कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य में मेरे साथ रहना। कभी कोई दान अकेले नहीं करना, उसमें मुझे सहभागी बनाना।यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

द्वितीय वचन - 

कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

तृतीय वचन - 

तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन- पोषण करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।

चतुर्थ वचन - 

कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।

पंचम वचन -

इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी सलाह लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

छठा वचन - 

कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

सातवां वचन - 

अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।
-----------------------------------------
-----------------------------------------

No comments:

Post a Comment

whatsapp button