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Saturday, 23 September 2017

क्यों करते हैं व्यस्क, बच्चों का यौन शोषण

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हमारे समाज में अनेकों बुराइयां व्याप्त हैं, जिनका सामना करते हुए और जिनसे लड़ते हुए हम इस दुनिया में जीते हैं। लेकिन अगर सबसे ज्यादा अमानवीय और उपेक्षित कृत्य की बात करें तो वो है बाल शोषण। और इस विषय पर सबसे ज्यादा ध्यान देने लायक बात ये है कि ये कृत्य जितना अमानवीय है उतनी ही तेज़ी से फैल भी रहा है। जिसका सबूत है हाल ही के दिनों में एक के बाद एक करके सामने आने वाली बाल शोषण की अनेक घटनाएं। आमतौर पर ये मान लिया गया है की शोषण का अर्थ केवल शारीरिक दुर्व्यवहार है लेकिन सीडीसी (कंसलटेंसी डेवलपमेंट सेंटर) के अनुसार, बच्चे के अभिभावक या माता-पिता द्वारा किया गया हर ऐसा काम बाल शोषण के दायरे में आता है, जिससे उसके ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता हो, और बच्चा मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करता हो। कोई मासूम बच्चा जब शोषण का शिकार होता है, तो ना केवल उसके शरीर और मन बल्कि पूरे जीवन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है।
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बाल यौन शोषण (Child sexual abuse)

बाल शोषण का ही एक प्रकार है 'बाल यौन शोषण' जिसमें एक व्यस्क व्यक्ति अपने आनंद के लिए बच्चे का शोषण करता है। दरअसल ये शोषण किसी नार्मल मानसिकता वाले व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि ये एक बीमारी होती है जिसका नाम 'पीडोफीलिया' है। पीडोफीलिया से ग्रस्त व्यक्ति पीडोफाइल कहलाता है।पीडोफाइल एक महिला भी हो सकती है और पुरुष भी। ऐसी कोई भी महिला या पुरुष पीडोफीलिया से ग्रस्त हो सकता है, जो स्वयं बचपन में बाल शोषण का शिकार हुई हो या हुआ हो। इसके अतिरिक्त कोई ऐसा व्यक्ति जिसका अपनी उम्र के लोगों से और समाज में मिलना जुलना कम हो, शारीरिक क्षमता कमजोर और दुर्बल हो,  मन हीन भावना से ग्रस्त हो, और जो बच्चों के साथ अधिक समय बिताता हो पीडोफाइल हो सकता है। ऐसा व्यक्ति बच्चों पर आक्रमण करने से पहले शराब या नशे का आदी नहीं होता और सामान्यतः छोटे लड़कों को अपना शिकार बनाता है।

पीडोफिलिया (PEDOPHELIA)

पीडोफिलिया नामक बीमारी की एक और स्टेज 'सुपर पीडोफीलिया' कहलाती है। एक सुपर पीडोफाइल व्यक्ति का शारीरिक विकास सामान्य होता है। समाज तथा हमउम्र लोगों से मेलजोल भी साधारण व्यक्ति की तरह होता है। सामान्यतः सुपर पीडोफाइल शादीशुदा होता है। अत्यधिक तनाव और दबाव इन व्यक्तियों में पीडोफीलिक प्रवृत्ति को बढ़ा देते हैं। ये व्यक्ति शराब या नशे से प्रभावित होकर लड़कियों को अपना शिकार बनाते हैं।
अब तक पीडोफ़ीलिया की कोई एक वजह पता नहीं चली है, लेकिन इस प्रवृत्ति को विकसित होने के लिए कई कारण एक साथ काम करते हैं। ये बात उन मामलों के आधार पर कही जा सकती है जिसमें लोगों को आपराधिक सज़ा हुई है।
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ऐसे शादीशुदा आदमी जिनके बचपन में पारिवारिक माहौल अच्छा नहीं था। इसके अलावा सर पर लगे आघात जिनमें न्यूरोटॉक्सिन, जेनेटिक गड़बड़ी, और सर पर लगी चोट शामिल हैं, को पीडोफ़ीलिया की संभावित वजहें बताया जाता है। वो लोग जिनका बचपन में शोषण हुआ हो उनके खुद हमलावर बनने की आशंका बहुत ज़्यादा होती है, क्योंकि उनमें अपने शोषण के ख़िलाफ़ लगातार एक गुस्सा बना रहता है, और इसलिए वह दूसरे बच्चों का शोषण करते हैं। एक पीड़ित से एक शोषक बनना स्वाभाविक मनोविकार है। पीडोफीलिया के केस में डर केवल अजनबियों से है, ऐसा कहना गलत होगा। पीडोफिलिया के मामले में हमलावर परिवार में से या बच्चे के नज़दीकी लोगों में से एक होता है। रिश्तेदारी में बच्चों का शोषण करने वाले पीडोफाइल की बुद्धिमत्ता का स्तर किसी दूसरे पीडोफाइल व्यक्ति से ज़्यादा होता है।
बच्चे को किसी भी अनहोनी से बचाने का केवल एक ही तरीका है, और वो है माता पिता का बच्चे के साथ बेहतर संवाद और सम्बन्ध। बेहतर संवाद के जरिये ही माँ बाप बच्चे को गुड टच और बैड टच के बारे में अच्छे से समझा सकते हैं। और बेहतर सम्बन्ध होंगे तभी बच्चा अपनी भावनाएं और दिनचर्या अपने माता पिता से शेयर कर सकेगा और बता सकेगा की उसके संपर्क में रहने वाले लोगों का आचार-व्यवहार कैसा है।
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