उन डरावने चेहरों का रहस्य, आज तक नहीं सुलझा - fun offbeat

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Thursday, 3 August 2017

उन डरावने चेहरों का रहस्य, आज तक नहीं सुलझा

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स्पेन के परेरा परिवार में उस समय चीख पुकार मच गयी जब उनके रसोईघर के फर्श पर रहस्यमयी डरावनी आकृतियां उभरने लगीं। बेल्मेज़ डे, ला मोरलैड नाम के गांव की आबादी करीब 2,000 लोगों की थी।1971 में एक दिन, घर में रहने वाली एक सदस्य मारिया गोमेज़ परेरा ने अपनी रसोई के कंक्रीट फर्श पर एक असामान्य सा दाग देखा। धीरे धीरे ये दाग गहरा होता गया और इस धब्बे ने एक आदमी के चेहरे जैसा आकर ले लिया।
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भयभीत, मारिया ने इसे साफ़ करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके पति ने उस रहस्यमयी चेहरे के दाग को पूरी तरह से नष्ट करने का फैसला किया। उसने एक कुल्हाड़ी की मदद से फर्श को पूरा खोद डाला, और नयी कंक्रीट से फर्श डलवा दिया। स्थिति सामान्य हो गयी। पर एक हफ्ते बाद ही वो चेहरा फिर से दिखाई देने लगा। ये अफवाह उस छोटे से शहर में जल्दी ही फैल गयी।
सोशल मीडिया पर इनको कहे गए सबसे ज्यादा अपशब्द 
परेरा हाउस में घटी इस अजीब घटना का निरीक्षण करने के लिए पड़ोसी भी आने लगे। परिवार के सभी लोग चाहते थे कि उनके घर में जो बुरी शक्ति थी, उसका अंत जल्दी हो जाये। लेकिन इससे पहले कि वे दूसरी बार चेहरे को नष्ट कर पाते, शहर के महापौर ने घोषित कर दिया कि इस साइट की खुदाई अध्ययन के लिए की जाएगी।

जमीन में गहरी खुदाई की गयी, कंक्रीट के फर्श को उखाड़ कर और पुरानी नींव के नीचे जो देखा गया, उससे सभी को झटका लग गया। वहां पर कुछ नर कंकाल थे, उन कंकालों को निकाला गया और स्टडी के लिए भेजा गया। शोधकर्ताओं ने शोध करके ये निष्कर्ष निकाला कि ये कंकाल 13 वीं शताब्दी के आस पास के थे।
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इस घटना के बाद उन कंकालों का स्थानीय कब्रिस्तान में कैथोलिक धर्मानुसार अंतिम संस्कार किया गया। परेरा परिवार को फिर से घर का फर्श बनवा कर दे दिया गया। पर ये चेहरे कुछ दिन बाद फिर से फर्श पर दिखाई देने लगे। अब तक, बेल्मेज़ फेसेज़ की खबर आस पास के शहरों और गावों में बहुत अच्छी तरह से फैल गयी थी। पत्रकार और पैरानॉर्मल शोधकर्ता अजीब दृश्यों का अनुभव करने की उम्मीद में उस गांव की तरफ आने लगे थे।

जर्मन जांचकर्ता डॉ. हंस बेेंडर ने घटना को 20 वीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण पैरानॉर्मल घटना घोषित कर दिया।बड़े पैमाने पर घटना की जाँच शुरू की गयी, लेकिन इस बात का जवाब नहीं मिल पाया कि क्यों ये बेलमेज़ चेहरे परेरा के घर में रहते थे, या वे कहां से आए थे।

2004 में, मारिया का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लेकिन जिन्दा हैं ये सवाल जो आज तक सुलझ नहीं सके कि, क्या इन रहस्यमय आकृतियों में खोई हुई आत्माओं की पीड़ा हैं, या एक कलाकार की पेंटिंग, या सिर्फ एक कल्पना। पर एक बात निश्चित है कि बेल्मेज़ चेहरे की खाली आंखें नीचे से ऊपर की तरफ देखती रहती हैं।

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